आम की गुठली का स्वादिष्ट अचार बनाने की पारंपरिक विधि

Parul Devi
0

 ।


आम की गुठली का स्वादिष्ट अचार बनाने की पारंपरिक विधि



भारत में अचार बनाने की परंपरा बहुत पुरानी है। आम का अचार तो हर घर में बनता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आम की गुठली से भी बेहद स्वादिष्ट, टिकाऊ और पौष्टिक अचार बनाया जाता है। पुराने समय में जब संसाधन सीमित होते थे, तब लोग आम की गुठली को बेकार नहीं फेंकते थे, बल्कि उससे अचार, चटनी और औषधीय उपयोग करते थे।


आम की गुठली का अचार स्वाद में हल्का कड़वा, तीखा और मसालेदार होता है। यह पाचन को मजबूत करता है और लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।


आम की गुठली क्या होती है

आम के अंदर जो कठोर बीज होता है उसे गुठली कहते हैं। इस गुठली के अंदर एक सफेद या हल्की क्रीम रंग की गिरी होती है, जिसे निकालकर अचार बनाया जाता है। यही गिरी असली उपयोगी हिस्सा होती है।


सही गुठली का चुनाव

हमेशा पके हुए आम की गुठली लें


सड़े या फफूंद लगे आम की गुठली न लें


देसी आम की गुठली अचार के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है


गुठली को तैयार करने की पूरी प्रक्रिया

यह चरण सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं गलती होने पर अचार कड़वा या खराब हो सकता है।


चरण 1: गुठली सुखाना

आम खाने के बाद गुठलियों को साफ पानी से धो लें।

अब इन्हें 2 से 4 दिन तक तेज धूप में सुखाएँ।

सुखाने से गुठली सख्त हो जाती है और अंदर की गिरी सुरक्षित रहती है।


चरण 2: गिरी निकालना

सूखी गुठली को पत्थर, हथौड़े या सिलबट्टे से हल्के हाथ से तोड़ें।

अंदर से सफेद गिरी निकाल लें।

ध्यान रखें कि गिरी टूटे नहीं।


चरण 3: कड़वाहट कम करना

गुठली की गिरी में प्राकृतिक कड़वाहट होती है।

इसके लिए दो तरीके अपनाए जा सकते हैं:


तरीका 1:

गिरी को छोटे टुकड़ों में काट लें और एक रात नमक मिले पानी में भिगो दें।

सुबह साफ पानी से धोकर धूप में सुखा लें।


तरीका 2:

गिरी को हल्का उबाल लें और पानी फेंक दें।

फिर धूप में पूरी तरह सुखा लें।


अचार के लिए आवश्यक सामग्री

मुख्य सामग्री

आम की गुठली की गिरी – 500 ग्राम


सरसों का तेल – 250 से 300 ग्राम


मसाले

नमक – स्वादानुसार


हल्दी पाउडर – 1 छोटी चम्मच


लाल मिर्च पाउडर – 1 से 2 छोटी चम्मच


राई (सरसों के दाने) – 2 बड़ी चम्मच


सौंफ – 2 बड़ी चम्मच


मेथी दाना – 1 छोटी चम्मच


कलौंजी – आधी छोटी चम्मच


हींग – एक चुटकी


मसाले तैयार करने की विधि

एक भारी तवे को धीमी आंच पर रखें।

उसमें राई, सौंफ और मेथी दाना डालें।

हल्का भूनें जब तक खुशबू न आने लगे।

ज्यादा भूनने से मसाले जल सकते हैं।

ठंडा होने पर इन्हें दरदरा पीस लें।

दरदरा मसाला अचार में बेहतर स्वाद देता है।


अचार बनाने की विधि (मुख्य प्रक्रिया)

एक बड़ा और सूखा बर्तन लें


उसमें गुठली के सूखे टुकड़े डालें


अब नमक और हल्दी डालकर अच्छी तरह मिलाएँ


इसके बाद पिसे हुए मसाले डालें


लाल मिर्च, कलौंजी और हींग डालें


सबको हाथ या लकड़ी के चम्मच से अच्छी तरह मिलाएँ


तेल डालने की सही विधि

सरसों के तेल को कढ़ाही में डालें।

तेल को तब तक गर्म करें जब तक उसमें से धुआँ न उठने लगे।

अब गैस बंद कर दें।

तेल को थोड़ा ठंडा होने दें, ताकि वह बहुत ज्यादा गर्म न रहे।

अब यह गुनगुना तेल अचार के ऊपर डालें।

अच्छी तरह मिलाएँ ताकि हर टुकड़ा तेल में लिपट जाए।


अचार को पकाने (सेट होने) की विधि

अचार को कांच या मिट्टी के जार में भरें।

जार पूरी तरह सूखा होना चाहिए।

ढक्कन कसकर बंद करें।


अब 7 से 10 दिन तक:


रोज़ 3 से 4 घंटे धूप में रखें


रोज़ एक बार सूखे चम्मच से हिलाएँ


इस प्रक्रिया से अचार अपने आप पकता है और स्वाद विकसित होता है।


अचार कब खाने लायक होता है

लगभग 10 दिन बाद अचार खाने के लिए तैयार हो जाता है।

जितना पुराना होता जाएगा, स्वाद उतना ही गहरा होता जाएगा।


अचार खराब न हो इसके लिए जरूरी सावधानियाँ

अचार में कभी भी पानी न जाए


गीला चम्मच बिल्कुल इस्तेमाल न करें


अचार हमेशा तेल में डूबा रहना चाहिए


नमी वाली जगह पर न रखें


ढक्कन हमेशा बंद रखें


इन नियमों का पालन करने पर यह अचार 1 साल या उससे अधिक समय तक सुरक्षित रहता है।


आम की गुठली के अचार के फायदे

पाचन शक्ति को मजबूत करता है


पेट की गैस और अपच में सहायक


भूख बढ़ाने में मदद करता है


शरीर को गर्मी देता है


सर्दियों में विशेष लाभदायक


पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों में शामिल


निष्कर्ष

आम की गुठली का अचार एक ऐसा पारंपरिक व्यंजन है जिसे आज लोग भूलते जा रहे हैं। जबकि यह स्वाद, सेहत और बचत तीनों के लिए लाभदायक है। सही विधि से बनाया जाए तो यह अचार साल भर चलता है और खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है।

Post a Comment

0 Comments
Post a Comment (0)
To Top